शिमला( हिमाचल प्रदेश)
आईजीएमसी शिमला में हुए मारपीट मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खु बड़ा बयान दिया है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि आईजीएमसी में जो घटना घटी वह किसी भी परिस्थिति में नहीं होनी चाहिए थी लेकिन इसके बाद जिस तरह से डॉक्टर की बर्खास्तगी हुई वह भी सही निर्णय नहीं था।
मरीज के साथ अटेंडेंट की संख्या पर बनेगी नई नीति बनेगी
रिज मैदान पर अटल बिहारी वाजपेई जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है उन्होंने कहा कि मरीज के साथ कितने अटेंडेंट होंगे इसे लेकर सरकार जल्द ही स्पष्ट नीति बनाएगी ताकि भविष्य में भी ऐसी घटना को पुर्नवृत्ति न हो।
मुख्यमंत्री सूक्खु का कहना है कि मरीज डॉक्टर को भगवान के समान मानता है और इलाज की उम्मीद को लेकर अस्पताल आता है ऐसे में डॉक्टर और मरीज के बीच की किसी भी तरह की हिंसा भी दुर्भाग्यपूर्ण है अगर मरीज या अटेंडेंट को किसी डॉक्टर के व्यवहार से कोई शिकायत है तो उसके लिए शिकायत का रास्ता मौजूद है मारपीट समाधान नहीं है।
डॉक्टर के बढ़ते वर्कलोड और स्ट्रेस पर सरकार गंभीर
उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार डॉक्टर पर बढ़ते वर्कलोड और स्ट्रेस को लेकर भी गंभीर है कई डॉक्टर 48 - 48 घंटे तक ड्यूटी करते हैं जिसे देखते हुए सरकार ने ड्यूटी की अधिकतम सीमा 12 घंटे ते करने का निर्णय लिया है ताकि डॉक्टर मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर स्थिति में रह सके।यह भी पढ़े :- कुल्लू सैंज घाटी दुष्कर्म-हत्या केस: आत्महत्या बताने की कोशिश, 4आरोपी गिरफ्तार
मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया है कि उनके पास एक वीडियो आया है जिसमें डॉक्टर द्वारा मरीज के लिए दुर्व्यवहार का आरोप दिख रहा है लेकिन उन्होंने साफ किया है कि हर स्थिति में हिस्सा को सही नहीं ठहराया जा सकता सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्यवाही की है और आगे भी निष्पक्ष जांच निश्चित की जाएगी उन्होंने यह कहा है कि डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों के अधिकार दोनों के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
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